फरवरी में मुंबई पुलिस ने एक ऐसा गैंग पकड़ा था, जिसने 800 से अधिक जाली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी टू-व्हीलर मालिकों को दो साल में बेची थी। लॉन्ग-टर्म थर्ड पार्टी कवर अनिवार्य होने के बाद प्रीमियम बढ़ गए हैं और ऐसे में जालसाज ‘सस्ते’ विकल्पों की पेशकश कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे बचें
फेक पॉलिसी का मतलब आपको प्रीमियम की रकम का नुकसान ही नहीं है, लेकिन आपका वीइकल भी बिना इंश्योरेंस के होता है। पॉलिसी खरीदते या रिन्यू कराते समय कुछ सावधानी रखकर आप इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकते हैं। उदाहरण के लिए, मुंबई में रैकेट एक सतर्क कस्टमर के कारण पकड़ा गया था। उस कस्टमर ने इंश्योरेंस कंपनी के एकाउंट में प्रीमियम ट्रांसफर करने पर जोर दिया था, लेकिन जालसाजों के अपने एकाउंट में प्रीमियम जमा करने के लिए आश्वस्त करने की कोशिश करने पर कस्टमर को शक हुआ और उसने पुलिस को इसकी जानकारी दी।

कंपनी से पुष्टि करें
यह सुनिश्चित करें कि चेक इंश्योरेंस कंपनी के नाम पर हो या प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इंश्योरेंस कंपनी के बैंक एकाउंट में ट्रांसफर किया जाए। नकद भुगतान करने से बचें। पॉलिसी मिलने के बाद उसके नियम और शर्तों को पढ़ें और सुनिश्चित करें कि उसमें वे फीचर्स और बेनेफिट शामिल हैं, जिनका आपके साथ वादा किया गया था। आप पॉलिसी की डिटेल की पुष्टि के लिए इंश्योरेंस कंपनी के कॉल सेंटर पर संपर्क कर सकते हैं या ऑनलाइन यह किया जा सकता है।

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